नई दिल्ली: 'द फ्रीलेंस' की विशेष खोजी रिपोर्ट। देश की राजनीति में एक बार फिर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के बीच तनातनी अपने चरम पर पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली में आयोजित 'जन महाभियोग' और 'मॉक संसद' के मंच से विपक्ष ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया है। विपक्ष का आरोप है कि देश में नागरिकों के मतदान का अधिकार इस समय गंभीर खतरे में है और निर्वाचन आयोग निष्पक्षता के बजाय सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मॉक संसद की कार्यवाही के दौरान तीखे शब्दों में कहा कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत प्रभाव से उनके पद से हटाया जाना चाहिए। खरगे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के मौजूदा नेतृत्व के तहत चुनावों में पारदर्शिता पर सवालिया निशान खड़े हुए हैं और 'वोट चोरी' जैसी गंभीर घटनाएं लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सीधे निर्देशों के तहत कार्य कर रहे हैं, जो कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सीधा हमला है।
इस आयोजन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाया। राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि विपक्ष इस मामले में कानूनी और जनता के स्तर पर पूरी ताकत से मुकाबला करेगा और इस अनियमितता से बचकर निकलने नहीं दिया जाएगा। 'जन महाभियोग' के दौरान विपक्ष के नेताओं ने छह प्रमुख आरोप पत्र पेश किए, जिनमें चुनावी प्रक्रिया में कथित हेरफेर और डेटा सुरक्षा में सेंध के गंभीर दावे शामिल हैं।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई। भाजपा नेताओं ने विपक्ष के इस कदम को राजनीतिक स्टंट करार देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही है। भाजपा ने इसके लिए इतिहास का हवाला देते हुए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल की नीतियों पर भी निशाना साधा।
खोजी पत्रकारिता के दृष्टिकोण से यह घटना भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर कार्यपालिका और न्यायपालिका या निर्वाचन आयोग जैसे स्वतंत्र निकायों के बीच बढ़ते तनाव का एक और बड़ा उदाहरण है। चुनाव आयोग जैसे निष्पक्ष संस्थान पर इस तरह के सार्वजनिक महाभियोग के प्रस्ताव और राजनीतिक दलों की आमने-सामने की यह जंग आने वाले दिनों में देश के चुनावी सुधारों और राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 'द फ्रीलेंस' इस संवेदनशील मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और आगे की हर अपडेट पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।










