लखनऊ में अमित शाह का बड़ा राजनीतिक ऐलान
लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि यदि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के बाद एक बार फिर भाजपा की सरकार बनती है, तो राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी - Uniform Civil Code) को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। इस बयान को उत्तराखंड के बाद देश के सबसे बड़े सूबे में भाजपा के अगले बड़े वैचारिक और विधाई एजेंडे के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष पर तीखा हमला और 'अंगद का पैर' की उपमा
कार्यसमिति के मंच से विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर कड़ा प्रहार करते हुए अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार 'अंगद का पैर' बन चुकी है, जिसे कोई चाहकर भी हिला नहीं सकता। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि राज्य की जनता का विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास कार्यों के साथ है। शाह के इस बयान को केवल एक चुनावी हुंकार नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक परिदृश्य की एक बड़ी पटकथा के रूप में पढ़ा जा रहा है।
सपा और अन्य दलों की प्रतिक्रिया
गृह मंत्री के यूसीसी वाले बयान और उनके तीखे तेवरों के बाद राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अप्रत्यक्ष रूप से पलटवार किया। सपा मुख्यालय में दिए गए अखिलेश के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूसीसी का मुद्दा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा ध्रुवीकरण करने वाला बिंदु बन सकता है।











