इजरायली राजनीति का नया मोड़ और अरब मीडिया की प्रतिक्रिया
इजरायल की राजनीति में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन चुनाव में बहुमत के आंकड़े से पिछड़ता हुआ नजर आ रहा है, जिसके बाद से मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कयासों का दौर तेज हो गया है। 'द फ्रीलेंस' की विशेष पड़ताल के अनुसार, इस राजनीतिक उथल-पुथल पर अरब मीडिया की नजरें सबसे ज्यादा टिकी हुई हैं। अरब जगत के प्रमुख समाचार संस्थानों में इस बात पर गहन चर्चा हो रही है कि क्या यह इजरायल की वर्तमान दक्षिणपंथी राजनीति के पतन की शुरुआत है या फिर नेतन्याहू कोई नया राजनीतिक दांवपेंच खेलने की तैयारी में हैं।
धांधली के आरोप और विपक्ष का पलटवार
चुनाव परिणामों में बहुमत से पिछड़ने के बाद नेतन्याहू की पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में 'धांधली' के गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। वहीं, इसराइल के विपक्षी दलों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे चुनावी नतीजों को पलटने के लिए गढ़ी गई एक 'झूठी कहानी' करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि हार की बौखलाहट में इस तरह के मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं ताकि जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया से भरोसा उठाया जा सके।
कतर और तुर्की से फंडिंग के आरोप
मामले में नया मोड़ तब आया जब इस चुनावी प्रक्रिया में विदेशी हस्तक्षेप और फंडिंग के आरोप लगाए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विपक्ष पर कतर और तुर्की से फंडिंग मिलने के आरोप मढ़े गए हैं, जिस पर विपक्षी खेमे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का साफ तौर पर कहना है कि ये सारे आरोप निराधार हैं और जनता के जनादेश को मोड़ने का एक असफल प्रयास मात्र हैं।










