कनाडा में बदलते आर्थिक और प्रशासनिक समीकरण
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन दिनों कनाडा सुर्खियों में बना हुआ है। एक तरफ जहां कनाडा सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए वैश्विक साझेदारियों पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की चुनौतियां भी उभर कर सामने आ रही हैं। हाल ही में कनाडा ट्रेड मिशन ने भारत में अपनी उपस्थिति को मजबूत करते हुए 30 से अधिक साझेदारियों के जरिए 300 मिलियन डॉलर के नए समझौतों पर मुहर लगाई है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यावसायिक संबंधों को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, भले ही कूटनीतिक स्तर पर पिछले कुछ महीनों में तनाव देखा गया हो।
अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता और पीएम का बयान
जर्मन मीडिया आउटलेट 'DW' की रिपोर्ट के अनुसार, खुद कनाडा के प्रधानमंत्री ने यह स्वीकार किया है कि उनका देश अपनी रणनीतिक और आर्थिक जरूरतों के लिए अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा निर्भर है। इस बयान ने कनाडा के राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या देश को अपनी विदेश नीति और आर्थिक प्राथमिकताओं में विविधता लाने की आवश्यकता है। भू-राजनीतिक परिदृश्य में कनाडा के लिए यह आत्ममंथन का समय माना जा रहा है।
कड़े हुए इमिग्रेशन नियम और भारतीय प्रवासियों की मुश्किलें
भारतीय नागरिकों और खासकर पंजाबी प्रवासियों के लिए कनाडा से जुड़ी खबरें चिंताजनक भी हैं। कनाडा सरकार ने इमिग्रेशन नियमों को और अधिक सख्त कर दिया है। नए नियमों के उल्लंघन पर 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। जानकारों का मानना है कि इन कड़े नियमों से उन छात्रों और कामगारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो कनाडा में बसने का सपना देख रहे हैं। इसके साथ ही, हाल ही में होशियारपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जहां एक महिला द्वारा अपने पति से 29 लाख रुपये ठगकर कनाडा भागने और मोबाइल नंबर ब्लॉक करने का सनसनीखेज मामला दर्ज हुआ है। इस प्रकार की घटनाएं कनाडा जाने वाले इमिग्रेंट्स के बीच धोखाधड़ी के मामलों को उजागर करती हैं।










