'द फ्रीलेंस' विशेष खोजी रिपोर्ट: जेल के गेट पर फिर खिंचा सियासी गलियारों का तनाव
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक पटल पर एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर के पूर्व सांसद आजम खान तथा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर जेल से रिहाई की आस लगाए बैठे पिता-पुत्र को जेल की चारदीवारी से बाहर कदम रखते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद जेल के बाहर मौजूद उनके समर्थकों में भारी आक्रोश देखा गया और जमकर हंगामा हुआ।
11 महीने 14 दिन की कैद के बाद भी घर नहीं लौट सके आजम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आजम खान पिछले 11 महीने और 14 दिन से जेल में बंद थे। उनकी रिहाई की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन ठीक उसी वक्त केंद्रीय जांच एजेंसी ED ने शिकंजा कस दिया। घटनाक्रम के अनुसार, रिहाई से महज कुछ घंटे और दिन पहले ईडी की यह बड़ी कार्रवाई सामने आई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि जांच एजेंसियों की रडार पर चल रहे मामलों की आंच अभी ठंडी नहीं हुई है।
'यह एक मुसलमान होने की सजा है': आजम खान का तीखा रिएक्शन
हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले या बाहर आते वक्त मीडिया के कैमरों के सामने आजम खान का दर्द छलक उठा। उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल किया, 'यह एक मुसलमान होने की सजा है?' इसके साथ ही उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि देश में अब कानून का वजूद लगभग खत्म हो चुका है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है, वहीं जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्र इसे तय कानूनी प्रक्रियाओं का हिस्सा मान रहे हैं।













