नई दिल्ली: 'द फ्रीलेंस' की विशेष खोजी रिपोर्ट। देश की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी प्रक्रिया की वैधता और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर तीखा सवालिया निशान लग गया है। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक अनूठे 'जन महाभियोग' और 'मॉक संसद' कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी के इन बयानों ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है और एक बार फिर से 2024 के आम चुनावों की पारदर्शिता पर बहस छिड़ गई है।
2024 का लोकसभा चुनाव 'अवैध': राहुल गांधी का दावा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने खुले तौर पर दावा किया कि वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव सामान्य और निष्पक्ष नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से 'अवैध' था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया और मतदाताओं के वोट काटे गए। राहुल गांधी ने कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग और अधिकारी इस प्रकार की वोट कटाई और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के षड्यंत्र में शामिल थे, वे देश के अपराधी हैं और उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
सीईसी ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह के मुकदमे की मांग
इस 'जन महाभियोग' कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी के तेवर बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए कहा कि उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार करने वालों को इतिहास माफ नहीं करेगा और उन्हें कानूनी दायरे में लाकर कटघरे में खड़ा किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे जनता के बीच ले जाकर एक बड़े आंदोलन का रूप देगा।












