द द फ्रीलैंस: विशेष खोजी रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता और समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर जेल से रिहाई की आस लगाए बैठे आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जेल के दरवाजे पर ही एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद जेल के बाहर भारी हंगामा देखने को मिला और उनके समर्थकों में रोष व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आजम खान पिछले 11 महीने और 14 दिन से जेल में बंद थे। उनकी कानूनी टीम ने विभिन्न मामलों में राहत हासिल करते हुए उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया था। जैसे ही उनके रामपुर जेल से बाहर आने की प्रक्रिया पूरी होने वाली थी, ठीक उसी समय ED के अधिकारियों ने दोनों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। एजेंसी की इस कार्रवाई से प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मच गया और जेल परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत कड़ा करना पड़ा।
हिरासत में लिए जाने के बाद जब आजम खान मीडिया के सामने आए, तो उनका दर्द साफ छलक उठा। उन्होंने बेहद भावनात्मक और तीखे अंदाज में कहा, 'यह एक मुसलमान होने की सजा है?' इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि अब देश में कानून का वजूद लगभग खत्म हो चुका है और कहने के लिए अब कुछ भी बाकी नहीं बचा है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
समर्थकों का गुस्सा इस बात पर फूट पड़ा कि तमाम कानूनी प्रक्रियाओं और जमानत के बाद भी आजम खान और उनके बेटे को चैन की सांस नहीं लेने दी जा रही है। जेल के बाहर मौजूद समर्थकों ने सरकार और जांच एजेंसियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस बल के साथ-साथ अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तैनात करना पड़ा ताकि कानून व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।











