गोरखपुर: उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनावों के परिणामों ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को एक बार फिर चरम पर पहुँचा दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र और राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हाल ही में संपन्न हुए एमएलसी चुनाव के नतीजे बेहद चौंकाने वाले और कांटे की टक्कर वाले रहे। यहाँ भाजपा समर्थित उम्मीदवार ध्रुव त्रिपाठी ने अत्यंत संघर्षपूर्ण मुकाबले में महज 307 मतों के अंतर से जीत हासिल कर चौथी बार एमएलसी के रूप में सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। हालांकि, यह जीत जितनी रोमांचक रही, उतनी ही यह विवादों और राजनीतिक खींचतान के घेरे में भी आ गई।
मतगणना में फंसा पेंच और चुनाव आयोग का दखल
प्राप्त प्राथमिक जानकारियों और मीडिया स्रोतों के अनुसार, मतगणना के दौरान स्थिति इतनी पेचीदा हो गई थी कि चुनाव आयोग को सीधे तौर पर हस्तक्षेप करना पड़ा। मुख्य मुकाबला तीन प्रमुख उम्मीदवारों के बीच सिमट गया था, जिससे वोटों की गिनती कई चरणों में उलझती चली गई। स्थिति यह हो गई कि मतों के पुनर्मूलग्यांकन और तकनीकी आपत्तियों के चलते कुछ समय के लिए प्रशासनिक मशीनरी पर भी दबाव साफ महसूस किया गया। एक समय ऐसा भी आया जब खुद भाजपा प्रत्याशी को धरنے पर बैठना पड़ा, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
समाजवादी पार्टी के गंभीर आरोप और अखिलेश यादव का तंज
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस पूरी चुनावी प्रक्रिया और परिणाम पर तीखा हमला बोला है। सपा खेमे का आरोप है कि सत्ताधारी दल ने निर्वाचन प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की है। यहाँ तक कि चुनाव के बीच में उम्मीदवार बदलने की रणनीति और प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग को लेकर भी सपा ने मोर्चा खोल दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरी प्रक्रिया पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया और बयानों के माध्यम से भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाए और तीखी प्रतिक्रिया दी।












