इजराइल में लोकतंत्र का महाकुंभ: रिकॉर्ड मतदान
'द फ्रीलेंस' के लिए विशेष खोजी रिपोर्ट। इजराइल की चुनावी राजनीति में एक बार फिर से अनिश्चितता और राजनीतिक गतिरोध के बादल मंडराने लगे हैं। देश भर में हुए मतदान के दौरान नागरिकों में भारी उत्साह देखा गया और महज 10 घंटों के भीतर ही 74.3% भारी मतदान दर्ज किया गया। यह उच्च मतदान प्रतिशत इस बात का गवाह है कि इजरायली अवाम अपने देश के राजनीतिक भविष्य को लेकर बेहद जागरूक और संजीदा है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर पड़े वोटों के बावजूद चुनाव परिणाम किसी एक दल या गठबंधन के पक्ष में स्पष्ट फैसला देने में नाकामयाब रहे हैं।
एग्जिट पोल के आंकड़े: त्रिशंकु संसद के स्पष्ट संकेत
मतदान समाप्त होने के बाद सामने आए तीन प्रमुख एग्जिट पोल के आंकड़े लगभग एक जैसी तस्वीर पेश कर रहे हैं। इन सभी सर्वेक्षणों के अनुसार, देश की संसद (क्रेसेट) में किसी भी दल या मोर्चे को बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल होता नहीं दिख रहा है। हालांकि, कार्यवाहक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी ने एक बार फिर से बढ़त हासिल की है और वह देश की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। इसके बावजूद, नेतन्याहू और उनके मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी आइज़नकोट के बीच कांटे की टक्कर और गतिरोध के चलते सरकार गठन की राह बेहद कठिन नजर आ रही है।
विपक्षी दलों की स्थिति और गठबंधन की पहेली
एग्जिट पोल के विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि हालांकि नेतन्याहू की पार्टी को व्यक्तिगत रूप से सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं, लेकिन समग्र रूप से विपक्षी दलों का गठबंधन सीटों के मामले में बराबरी पर या थोड़ा आगे खड़ा नजर आ रहा है। इजरायली राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या एक बार फिर देश मध्यावधि चुनावों की तरफ बढ़ेगा या छोटे दलों के समर्थन से किसी तरह की अस्थिर सरकार का गठन होगा। नेतन्याहू के सामने अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने और सरकार बनाने के लिए यह सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है।












