'द फ्रीलेंस' के विशेष खोजी अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि वैश्विक वित्तीय बाजार में अमेरिकी डॉलर (USD) का प्रभाव लगातार भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की यूएसडी-INR स्वैप सुविधा ने देश में अभूतपूर्व विदेशी मुद्रा प्रवाह को जन्म दिया है, जिसके तहत बैंकों ने मात्र 11 सप्ताह के भीतर 73 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं। यह कदम भारतीय बैंकिंग प्रणाली की तरलता और मजबूती को एक नया आयाम दे रहा है।
सेवा क्षेत्र का कमाल और निर्यात में उछाल
हमारे फील्ड डेटा और आधिकारिक मीडिया स्रोतों के विश्लेषण से पता चलता है कि केवल बैंकिंग स्वैप ही नहीं, बल्कि सेवा क्षेत्र (Services Boom) में आए भारी उछाल के कारण भारत का कुल निर्यात 2025-26 में रिकॉर्ड 863 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर आधारित लेन-देन का दायरा भी व्यापक हो रहा है।
एशियाई बाजारों में मुद्रा उतार-चढ़ाव
दूसरी ओर, एशियाई मुद्राओं के वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें तो स्थिति मिली-जुली बनी हुई है। जापानी येन में तेजी दर्ज की गई है, जबकि ताइवान डॉलर 33 के पार पहुंच गया है। यह उतार-चढ़ाव इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय मुद्राएं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति को संतुलित करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। वैश्विक स्तर पर डॉलर की चाल का असर सीधे तौर पर एशियाई व्यापारिक और वित्तीय बाजारों पर पड़ रहा है, जिसे हमारे आर्थिक विश्लेषक बारीकी से ट्रैक कर रहे हैं।














