SGX और GIFT सिटी का यह ऐतिहासिक मिलन
भारतीय वित्तीय बाजार के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ चुका है। सिंगापुर एक्सचेंज (SGX) से निफ्टी डेरिवेटिव्स के कारोबार का गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) में पूर्ण स्थानांतरण महज एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह वैश्विक वित्तीय मानचित्र पर भारत के बढ़ते दबदबे और आर्थिक स्वायत्तता का एक स्पष्ट प्रमाण है। 'द फ्रीलान्स' की विशेष खोजी रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के अलावा एक वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में GIFT सिटी की स्थापना को वैश्विक मान्यता दिला रहा है।
क्या हैं इसके दूरगामी भू-आर्थिक निहितार्थ?
दसों साल पहले, भारतीय शेयर बाजार के डेरिवेटिव्स का एक बड़ा हिस्सा सिंगापुर में ट्रेड होता था, जिसे 'SGX Nifty' के नाम से जाना जाता था। इससे भारत के बजाय विदेशी धरती पर तरलता (Liquidity) और मूल्य निर्धारण (Price Discovery) का नियंत्रण रहता था। अब गिफ्ट सिटी स्थित NSE IX पर 'Gift Nifty' के रूप में इसके लाइव होने से, भारतीय नियामक संस्थाओं—विशेषकर सेबी (SEBI)—की सीधी पहुंच और नियंत्रण इस पर स्थापित हो गया है। हमारी खोजी टीम द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस कदम से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को बिना किसी भौगोलिक बाधा के भारतीय विकास गाथा का हिस्सा बनने का सीधा अवसर मिल रहा है।
पारदर्शिता, समय और कर लाभ
इस स्थानांतरण के पीछे मुख्य उद्देश्य भारतीय बाजारों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और विदेशी निवेशकों के लिए अनुपालन (Compliance) को आसान करना था। GIFT सिटी में कारोबार करने पर मिलने वाले कर लाभ (Tax Incentives) निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। साथ ही, समय क्षेत्र (Time Zone) का लाभ अब पूरी तरह से भारतीय वित्तीय तंत्र के पक्ष में काम कर रहा है। सिंगापुर के मुकाबले भारतीय समयानुसार लंबी ट्रेडिंग विंडो मिलने से जोखिम प्रबंधन और हेजिंग रणनीतियों में अभूतपूर्व सुधार देखा गया है।











