नई दिल्ली: 'द फ्रीलेंस' के लिए विशेष खोजी रिपोर्ट। राजनीति और अर्थव्यवस्था का रिश्ता हमेशा से जटिल रहा है, लेकिन जब राजनीतिक रैलियों की कीमत आम व्यापारियों और दुकानदारों को चुकानी पड़े, तो यह गंभीर चिंतन का विषय बन जाता है। हाल ही में राजधानी दिल्ली में आयोजित 'इंडिया' गठबंधन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक बड़ी रैली के बाद व्यापार जगत से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) द्वारा किए गए दावों के अनुसार, इस एक राजनीतिक आयोजन के चलते दिल्ली के व्यापारियों को लगभग 12,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
2.5 लाख दुकानें बंद और कारोबारियों का रोष
खोजी पड़ताल के दौरान जब हमारी टीम ने विभिन्न व्यापार मंडलों और स्थानीय बाजारों का दौरा किया, तो जमीनी हकीकत इन दावों की पुष्टि करती नजर आई। सीटीआई (CTI) और अन्य व्यापारिक संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक, रैली के चलते सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक डायवर्जन और प्रशासनिक पाबंदियों के कारण दिल्ली के प्रमुख बाजारों में लगभग 2.5 लाख दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, करोल बाग और सदर्न एवेन्यू जैसे बड़े व्यावसायिक केंद्रों में सन्नाटा पसरा रहा, जहां अमूमन रोजाना अरबों रुपयों का लेन-देन होता है।
व्यापारी मांग रहे हैं हर्जाना
इस भारी नुकसान के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ व्यापारिक संगठनों और स्थानीय दुकानदारों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राजनीतिक दलों और विशेषकर राहुल गांधी के प्रति नाराजगी जाहिर की है। यहां तक कि कुछ नाराज व्यापारियों ने तो तंज कसते हुए यह मांग तक रख दी है कि ऐसे नेताओं को किसी ऐसी जगह भेज देना चाहिए जहाँ उनका कारोबार प्रभावित न हो। कारोबारियों का कहना है कि वे पहले से ही मंदी और अन्य आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, और ऐसे में एक दिन का व्यापार ठप होने से उन्हें उबरने में महीनों लग जाते हैं।











