नई दिल्ली/वाशिंगटन/तेहरान: 'द फ्रीलेंस' के लिए विशेष खोजी रिपोर्ट। मध्य पूर्व में मंडराते युद्ध के काले बादलों के बीच वैश्विक कूटनीति एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी प्रशासन और ईरान के बीच चल रहे तनातनी के माहौल में जहां एक तरफ सैन्य टकराव की आशंकाएं गहरी होती जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक रास्तों को टटोलने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। पिछले कुछ दिनों में सामने आए घटनाक्रम इस बात की गवाही दे रहे हैं कि स्थिति कभी भी किसी भी दिशा में पलट सकती है।
ईरान को विशेष अधिकार और बातचीत की सुगबुगाहट
प्राप्त प्राथमिक जानकारियों और खुफिया सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान सरकार को अमेरिका के साथ संभावित वार्ताओं के लिए कुछ विशेष और आंतरिक अधिकार दिए गए हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय जानकारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाशिंगटन और तेहरान के बीच दशकों पुरानी शत्रुता अब किसी समझौते की टेबल पर आ सकती है। हालांकि, इन वार्ताओं की सफलता और विफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष अपनी कठोर शर्तों से कितना पीछे हटते हैं। दूसरी ओर, अमेरिका के भीतर भी घरेलू राजनीति गर्म है। अमेरिकी सीनेट ने ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई पर 'युद्ध अधिकारों' (War Powers) को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
युद्ध की आशंकाएं और बाजार पर प्रभाव
एक तरफ जहां अमेरिकी सीनेट और कूटनीतिक गलियारों में शांति की चर्चाएं हैं, वहीं दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और अन्य मोर्चों पर मिल रहे पांच बड़े संकेतों ने इसी हफ्ते किसी संभावित अमेरिकी हमले की आशंका को जिंदा रखा है। तेहरान ने ट्रंप प्रशासन को सीधी चेतावनी जारी करते हुए अपनी 7 कड़ी शर्तें सामने रखी हैं, जिनमें युद्ध समाप्त करने और प्रतिबंध हटाने की मुख्य मांगें शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम में चीन खुलकर ईरान के समर्थन में आ गया है, जिससे यह भू-राजनीतिक संघर्ष अब महाशक्तियों के पाले में खिंचता दिखाई दे रहा है। इस युद्ध के अंदेशे का असर तुरंत वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिला है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जहां गिरावट दर्ज की गई है, वहीं सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की चमक अचानक तेज हो गई है।












