रामपुर जेल के बाहर नाटकीय घटनाक्रम
उत्तर प्रदेश की राजनीति के दिग्गज और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। रामपुर जेल से रिहाई की आस लगाए बैठे आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के लिए बाहर की दुनिया की हवा बहुत लंबी नहीं रही। जेल की सलाखों से बाहर आते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आजम खान को अपनी हिरासत में ले लिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से जेल के बाहर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और उनके समर्थकों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया।
समर्थकों का आक्रोश और सुरक्षा बलों की तैनाती
विभिन्न मीडिया स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जैसे ही यह खबर फैली कि आजम खान को केंद्रीय एजेंसी ने अपने कब्जे में ले लिया है, उनके समर्थक आक्रोशित हो उठे। जेल के मुख्य द्वार के बाहर भारी संख्या में जुटे सपाइयों और समर्थकों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित करार दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो।
'यह एक मुसलमान होने की सजा है?' - आजम खान
हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले या प्रक्रिया के दौरान आजम खान का दर्द खुलकर सामने आया। मीडिया के कैमरों के सामने उनका दर्द छलक उठा और उन्होंने तीखे सवाल खड़े किए। आजम खान ने भावुक और आक्रामक अंदाज में पूछा कि क्या यह सब एक मुसलमान होने की सजा है? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में कानून का वजूद लगभग खत्म हो चुका है और व्यवस्था का इस्तेमाल खास एजेंडे के तहत किया जा रहा है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।











