इजरायली राजनीति का नया समीकरण
तेल अवीव से 'द फ्रीलांस' के लिए वरिष्ठ फील्ड रिपोर्टर व खोजी पत्रकार की विशेष रिपोर्ट। इजरायल की राजनीति एक बेहद संवेदनशील और अप्रत्याशित मोड़ पर आ खड़ी हुई है। विभिन्न मीडिया सूत्रों और राजनीतिक गलियारों से छनकर आ रही जानकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए गॉडी आइजनकोट (Eisenkot) के साथ मिलकर एक नई सरकार के गठन की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस सियासी फेरबदल के पीछे केवल घरेलू राजनीतिक समीकरण ही नहीं, बल्कि इजरायल की संसद 'कनेसेट' में बदलते शक्ति संतुलन का डर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
अरब पार्टियों के बढ़ते प्रभाव से उपजा डर
खोजी विश्लेषणात्मक रिपोर्ट बताती है कि इस संभावित राजनीतिक गठजोड़ के पीछे सबसे बड़ा उत्प्रेरक इजरायल की अरब पार्टियों का विपक्ष को मिलने वाला बढ़ता समर्थन है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों में यह स्पष्ट हुआ है कि यदि विपक्ष एकजुट होकर अरब दलों के साथ मिलकर कोई सियासी चाल चलता है, तो नेतन्याहू के वर्तमान राजनीतिक आधिपत्य को तगड़ा झटका लग सकता है। इसी रणनीतिक खतरे भांपते हुए, नेतन्याहू खेमे ने संभावित जोखिमों को कम करने के लिए मध्यमार्गी और सैन्य पृष्ठभूमि वाले नेता गॉडी आइजनकोट को अपने पाले में लाने या उनके साथ एक व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने के विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है।
वैश्विक पटल पर सुलगते अन्य राजनीतिक संघर्ष
एक तरफ जहां इजरायल आंतरिक राजनीतिक उठापटक और संभावित चुनावों के साए में जी रहा है, वहीं वैश्विक स्तर पर भी कई बड़ी हलचलें अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर रही हैं। अमेरिका में मिडटर्म चुनावों के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के पारंपरिक गढ़ में डेमोक्रेट्स के आगे निकलने और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव ने अमेरिकी राजनीति को भी रोचक बना दिया है। दूसरी ओर, पूर्वी यूरोप के मोर्चे पर यूक्रेन से आ रही खबरें बेहद दहलाने वाली हैं। यूक्रेन में एक राहत केंद्र पर हुए भीषण रूसी हमले में 24 नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है। इस हमले के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि रूस किसी भी कीमत पर तनाव कम करने के मूड में नहीं है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अधिक पेचीदा हो गई है।












