नई दिल्ली/वाशिंगटन: 'द फ्रीलांस' के लिए विशेष खोजी रिपोर्ट। वैश्विक राजनीति के पटल पर एक बार फिर तनाव की सुई तेजी से घूम रही है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बड़े और अचानक सैन्य एक्शन को अंजाम दिया है। रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित केशम द्वीप को अमेरिकी हमलों का मुख्य निशाना बनाया गया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, द्वीप पर एक के बाद एक कई जोरदार धमाके सुने गए हैं, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर क्यों बरसे गोले?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कूटनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच भविष्य के समझौतों को लेकर सुगबुगाहट तेज थी। अमेरिका के नवनिर्वाचित या वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय जानकारों को भी चौंका दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब स्थित होने के कारण केशम द्वीप सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार माना जाता है। इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की सक्रियता और अचानक हुए इन धमाकों ने मध्य पूर्व में जारी तनाव को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
सीजफायर के उल्लंघन और राजनीतिक सरगर्मी
विभिन्न खुफिया और मीडिया स्रोतों से मिल रहे इनपुट संकेत देते हैं कि इस सैन्य कार्रवाई के साथ ही क्षेत्र में चल रहा आंशिक सीजफायर अब प्रभावी रूप से टूट गया है। अमेरिकी और पश्चिमी मीडिया के एक वर्ग में जहां इसे एक 'सीक्रेट ऑपरेशन' करार दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि हालिया बयानों और धरातल पर हो रही सैन्य कार्रवाइयों में भारी अंतर है। अमेरिकी नेतृत्व द्वारा हाल ही में संभावित वार्ताओं और डील्स के संकेत दिए गए थे, लेकिन इसके ठीक विपरीत इस प्रकार के हवाई या मिसाइल हमलों ने कूटनीतिक प्रयासों पर पानी फेर दिया है।












