स्रोत / Source: X (@VishalMYadav_)
देश के महानगरों और टियर-2 शहरों में आज के समय में यदि सबसे बड़ी कोई व्यावहारिक समस्या बनकर उभरी है, तो वह वाहनों के लिए पार्किंग का संकट है। इसी व्यवस्थागत संकट और इसके साथ जुड़ी आम नागरिकों की लापरवाही का एक जीवंत उदाहरण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वायरल हुए एक वीडियो क्लिप में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। 'द फ्रीलांस' के डिजिटल डेस्क को मिले इस वीडियो में जो दृश्य सामने आए हैं, वे केवल एक मामूली नो-पार्किंग विवाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह हमारे समाज की उस गहरी मानसिकता को उजागर करते हैं जहाँ कानून और नियम केवल दूसरों के लिए बने हैं, खुद के लिए नहीं।
नियमों की अनदेखी और 'मैं तो रोज़ लगाती हूँ' का अहंकार
वायरल फुटेज में एक युवती अपनी स्कूटी को एक ऐसे क्षेत्र में पार्क करने का प्रयास करती है जो स्पष्ट रूप से 'नो-पार्किंग जोन' के अंतर्गत आता है। जब वहां मौजूद एक सतर्क नागरिक या राहगीर उसे इस बात के लिए रोकता है और यातायात नियमों का हवाला देता है, तो युवती का जो जवाब सामने आता है, वह प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिक अनुशासन दोनों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। युवती बेझिझक कहती है, "मैं तो रोज़ यहीं लगाती हूँ।" यह वाक्य सिर्फ एक लापरवाही भरा बयान नहीं है, बल्कि यह उस हठधर्मिता का प्रतीक है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आम आदमी को परेशानी में डालती है।