स्रोत / Source: X (@rameshofficial0)
खाकी और आम नागरिक के बीच का फासला
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आए दिन पुलिस और जनता के बीच के टकराव के वीडियो सामने आते रहते हैं, लेकिन हाल ही में मुंबई के गिरगांव स्थित वीपी रोड पुलिस स्टेशन से जो दृश्य सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। एक आम नागरिक जब अपनी फरियाद लेकर थाने पहुंचा, तो वहां तैनात एक महिला पुलिस अधिकारी का रवैया पूरी तरह से पेशेवर मर्यादा के विपरीत नजर आया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अधिकारी न केवल वीडियो रिकॉर्डिंग होने के बावजूद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं, बल्कि अपना नेमप्लेट (बिल्ला) तक गुस्से में फेंक कर मारती हैं। यह घटना एक बार फिर खाकी वर्दी और आम आदमी के बीच के भरोसे की खाई को उजागर करती है।
प्रशासनिक जवाबदेही और पुलिस आचरण के नियम
भारतीय पुलिस सेवा और राज्य पुलिस नियमावली के तहत थानों में आने वाले प्रत्येक नागरिक के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना एक अनिवार्य कर्तव्य है। पुलिस स्टेशन जनता की सुरक्षा और न्याय के लिए बने होते हैं, न कि भय का माहौल पैदा करने के लिए। जब एक नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचता है, तो वह मानसिक रूप से पहले ही किसी समस्या या प्रताड़ना से जूझ रहा होता है। ऐसे में एक जिम्मेदार पद पर बैठी महिला अधिकारी द्वारा इस तरह का उत्तेजक और अमर्यादित आचरण न केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह कानून के रखवालों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। क्या इस प्रकार का व्यवहार जनता में सुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है? यह एक बड़ा और विचारणीय प्रश्न है।