केरल मर्सिडीज हादसा: न्यायपालिका और खाकी पर उठे गंभीर सवाल
केरल में हुए चर्चित मर्सिडीज हादसे ने एक बार फिर देश की न्याय व्यवस्था और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस सनसनीखेज मामले में शुरुआत से ही लीपापोती के आरोप लग रहे थे, जिसके चलते आम जनता और विभिन्न संगठनों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा था। जनभावनाओं के भारी दबाव और लगातार बढ़ते राजनीतिक व सामाजिक विरोध के आगे झुकते हुए आखिरकार राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े हैं।
जज के खिलाफ औपचारिक FIR दर्ज, पुलिस महकमे में हड़कंप
'द फ्रीलेंस' की खोजी टीम को मिले शुरुआती विवरणों के अनुसार, इस गंभीर सड़क दुर्घटना में संलिप्त बताए जा रहे एक न्यायिक अधिकारी (जज) के खिलाफ अब औपचारिक रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। घटना के बाद से ही यह आशंका जताई जा रही थी कि अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, मीडिया की पैनी नजर और जनहित के दबाव ने आखिरकार कानून को अपनी गति से काम करने के लिए मजबूर कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे प्रशासनिक और न्यायिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
चार पुलिसकर्मी सस्पेंड, सबूत मिटाने और लापरवाही का आरोप
जांच के दायरे में केवल आरोपी जज ही नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद और मामले की शुरुआती जांच संभालने वाले पुलिसकर्मी भी आ गए हैं। प्राथमिक रिपोर्टों के आधार पर कर्तव्य में भारी लापरवाही बरतने, साक्ष्यों के साथ कथित छेड़छाड़ करने और आरोपी को बचाने के प्रयासों के चलते चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसे के तुरंत बाद जांच को मोड़ने के पीछे आखिर किसका हाथ था।









