करवा चौथ पर मेहंदी का बाजार: परंपरा और आधुनिकता का संगम
द द फ्रीलांस (The FreeLance) के लिए विशेष खोजी रिपोर्ट। भारतीय संस्कृति में करवा चौथ के पर्व का विशेष महत्व है, और इसके साथ जुड़ी परंपराओं में मेहंदी का स्थान सर्वोपरि है। इस वर्ष करवा चौथ के नजदीक आते ही देश के विभिन्न बाजारों और ब्यूटी पार्लरों में महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश के मथुरा से लेकर जम्मू तक, हर जगह मेहंदी लगवाने को लेकर अभूतपूर्व उत्साह नजर आ रहा है। जमीनी स्तर पर हमारी पड़ताल बताती है कि इस बार बाजारों में पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों का अनूठा मिश्रण देखने को मिल रहा है।
अरेबिक और राजस्थानी डिजाइनों की बूम
मीडिया स्रोतों और हमारे फील्ड सर्वे के अनुसार, इस साल महिलाओं के बीच अरेबिक, इंडो-अरेबिक और राजस्थानी मेहंदी डिजाइनों की मांग सबसे ज्यादा है। खासकर जम्मू और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं में एक नया क्रेज देखने को मिला है, जहां विशेष रूप से राजस्थान से बुलाए गए कारीगर अपने हुनर का प्रदर्शन कर रहे हैं। चांद-छलनी के पारंपरिक motifs से लेकर दूल्हा-दुल्हन की आकृतियों तक, हर डिजाइन की अपनी अलग मांग है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर भी '10 खूबसूरत पैटर्न' और विशेष करवा चौथ डिजाइनों की खोज में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
खूबसूरती के पीछे छिपी एलर्जी की चुनौती
हालांकि, इस उल्लास के बीच खोजी पत्रकारिता के तहत एक गंभीर पहलू सामने आया है। गहरे लाल रंग की चाह में कई महिलाएं ऐसी मेहंदी का इस्तेमाल कर रही हैं जिनमें हानिकारक केमिकल्स होते हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स और त्वचा विशेषज्ञों के हवाले से यह बात सामने आई है कि केमिकल युक्त मेहंदी के कारण हाथों में जलन, लालिमा और गंभीर खुजली जैसी एलर्जी की शिकायतें बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पर्व की खुशियों के बीच स्वास्थ्य सुरक्षा को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, और किसी भी प्रकार की एलर्जी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।











