नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: उम्मीदों के आसमान में सुस्ती के बादल
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट' (जेवर एयरपोर्ट) को लेकर एक तरफ जहां विकास और वैश्विक स्तर की कनेक्टिविटी के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ज़मीन पर कुछ ऐसी चौंकाने वाली और विरोधाभासी तस्वीरें उभर रही हैं जो नीति निर्धारकों की चिंता बढ़ाने के लिए काफी हैं। 'द फ्रीलांस' की विशेष खोजी रिपोर्ट के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों के दौरान यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच के दो महीनों में यात्रियों की आवाजाही में करीब 27 प्रतिशत तक की भारी कमी आई है। यह आंकड़ा विमानन क्षेत्र के विश्लेषकों के लिए मंथन का विषय बना हुआ है, क्योंकि शुरुआती उत्साह के बाद इस प्रकार का ठहराव या गिरावट क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और उड़ानों की स्थिरता पर सवालिया निशान लगाता है।
6 लाख से 24 करोड़ का खेल: एयरपोर्ट से जुड़े वित्तीय अपराध का पर्दाफाश
यात्रियों की संख्या में गिरावट के तकनीकी और व्यावसायिक कारणों के बीच, नोएडा और जेवर एयरपोर्ट से जुड़ा एक अन्य सनसनीखेज मामला भी सामने आया है जिसने कानून प्रवर्तन एजेंसियों को हैरान कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नोएडा के एक डॉक्टर और उसकी पत्नी ने मिलकर एक बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। इस शातिर दंपति ने महज 6 लाख रुपये से अपने ठगी के खेल की शुरुआत की थी और धीरे-धीरे इसे बढ़ाते हुए 24 करोड़ रुपये तक के बड़े घोटाले को अंजाम दे डाला। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ठगी के तार एयरपोर्ट के कमर्शियल स्पेस और फूड कोर्ट के नाम पर निवेशकों को लुभाने से भी जुड़े बताए जा रहे हैं।
खोजी पत्रकारिता की पड़ताल: विकास और अपराध का अंतर्संबंध
'द फ्रीलांस' के फील्ड संवाददाताओं द्वारा जुटाई गई प्राथमिक जानकारियों से यह स्पष्ट होता है कि जहां एक ओर जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर बूम के नाम पर बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नियामक तंत्र की ढिलाई का फायदा उठाकर शातिर ठग और अपराधी भी सक्रिय हो चुके हैं। एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों में कमर्शियल यूनिट्स, फूड कोर्ट और अन्य संपत्तियों के नाम पर भोले-भाले निवेशकों को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।











