नई दिल्ली/बीजिंग: डिजिटल युग में तकनीक जितनी सुलभ होती जा रही है, उतनी ही हमारी व्यक्तिगत गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ती जा रही है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मीडिया और तकनीकी सुरक्षा एजेंसियों से प्राप्त रिपोर्टों ने दुनिया भर के तकनीकी बाजारों में सनसनी फैला दी है। चीन में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जा रहे 13 लाख से अधिक टीवी बॉक्स (TV Boxes) में दुर्भावनापूर्ण 'बैकडोर' (Backdoor) स्थापित पाए गए हैं। 'द फ्रीलांस' के विशेष अनुसंधान दल द्वारा की गई पड़ताल से यह स्पष्ट होता है कि कैसे ये हार्डवेयर डिवाइस उपयोगकर्ताओं के डेटा को अनधिकृत रूप से खतरे में डाल रहे हैं।
हार्डवेयर सुरक्षा में बड़ी सेंध
खोजी पत्रकारिता के दौरान सामने आए तथ्य बताते हैं कि ये प्रभावित टीवी बॉक्स दिखने में सामान्य मनोरंजन उपकरण प्रतीत होते हैं, परंतु इनके फर्मवेयर में इस प्रकार की कोडिंग की गई है जो चुपचाप उपयोगकर्ताओं की गतिविधियों को ट्रैक कर सकती है और रिमोट सर्वर के साथ संवेदनशील डेटा साझा कर सकती है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे कि ट्विच (Twitch) और अन्य वीडियो ब्रॉडकास्टिंग माध्यमों पर इस प्रकार की हार्डवेयर Vulnerabilities का प्रभाव अत्यंत गंभीर हो सकता है। जब हार्डवेयर स्तर पर ही सुरक्षा से समझौता किया जाता है, तो सॉफ्टवेयर सुरक्षा के उपाय भी बेअसर साबित होने लगते हैं।
घरेलू और राजनीतिक मोर्चे पर तकनीकी हलचल
एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा एक विकट चुनौती बनती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर भी अपराध और राजनीति का एक अलग ताना-बाना देखने को मिल रहा है। हाल ही में भोपाल में एक जनप्रतिनिधि के आवास पर हुई चोरी की घटना में टीवी और अन्य घरेलू सामानों की चोरी ने स्थानीय कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, तो वहीं राजनीतिक गलियारों में मीडिया रिपोर्टिंग और भ्रामक बयानों को लेकर चल रहा घमासान डिजिटल सूचनाओं की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा करता है। इसके अलावा, मनोरंजन जगत में अभिनेत्रियों की बदलती जीवनशैली से लेकर क्षेत्रीय व्यापार जगत में हुई शोक संवेदनाओं तक, समाज का हर हिस्सा आज किसी न किसी रूप में सूचनाओं के इस महाजाल से प्रभावित है।












