खोजी रिपोर्ट: 'The FreeLance' विशेष
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख केंद्र मेरठ इन दिनों दोहरे पर्यावरणीय संकट से गुजर रहा है। एक तरफ जहाँ शहर की आबोहवा एक बार फिर गंभीर श्रेणी की तरफ बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ मौसम के अचानक करवट लेने से आम जनजीवन प्रभावित होने के पूरे आसार हैं। 'The FreeLance' की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लुढ़ककर 238 पर पहुंच गया है, जो कि संवेदनशील और सांस के मरीजों के लिए खतरनाक संकेत है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी 29 से 31 अक्टूबर के बीच शहर में बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बेमौसम बरसात से तापमान में गिरावट तो दर्ज होगी, लेकिन यह उन सुहागिनों के लिए निराशाजनक हो सकता है जो करवा चौथ के चांद का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। हल्की बूंदाबांदी और बादलों की आवाजाही के बीच चांद के दीदार में खलल पड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, हाल ही में सक्रिय हुए 'अर्नब तूफान' के प्रभाव और हल्की बूंदाबांदी के चलते पर्यावरण में कुछ समय के लिए ठंडक और खुशनुमा माहौल जरूर देखा गया था, जिससे एक्यूआई में मामूली गिरावट दर्ज की गई थी। लेकिन यह राहत क्षणिक साबित हुई और प्रदूषण के स्तर ने एक बार फिर 238 का आंकड़ा छू लिया। जानकारों का मानना है कि पराली जलाने की घटनाओं और स्थानीय कारकों के चलते मेरठ की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते एक्यूआई और बदलते मौसम के इस मिले-जुले असर से अस्थमा, सांस की तकलीफ और एलर्जी से पीड़ित मरीजों की परेशानियां अचानक बढ़ सकती हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सलाह दी गई है कि वे स्थिति पर कड़ी नजर रखें। 'The FreeLance' की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और मौसम के हर अपडेट से अपने पाठकों को अवगत कराती रहेगी।











