प्रस्तावना: कर्नाटक की राजनीति का मर्म स्थल
कर्नाटक के दक्षिणी हिस्से में स्थित मंडा्या (Mandya) जिला हमेशा से राज्य की मुख्यधारा की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। कावेरी बेसिन के इस उपजाऊ क्षेत्र ने न केवल कृषि के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि यह राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में भी निर्णायक भूमिका निभाता आया है। 'द फ्रीलांस' की इस खोजी रिपोर्ट में हम यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर क्यों मंडा्या का नाम आते ही सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो जाती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और क्षेत्रीय समीकरण
मंडा्या को कर्नाटक की राजनीति का 'शुगर बाउल' यानी चीनी का कटोरा भी कहा जाता है, क्योंकि यहां गन्ने की प्रचुर मात्रा में खेती होती है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में इस भौगोलिक पहचान से ज्यादा इस क्षेत्र की जातीय और राजनीतिक पहचान मजबूत हुई है। वोक्कालिगा समुदाय बहुल यह इलाका जनता दल (सेक्युलर) और कांग्रेस के बीच पारंपरिक जंग का अखाड़ा रहा है। हाल के दिनों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी यहां अपनी पैठ मजबूत करने के लिए जो रणनीतिक कदम उठाए हैं, उसने त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति पैदा कर दी है।
जल संकट और कावेरी नदी विवाद
मंडा्या की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों की रीढ़ कावेरी नदी का पानी है। पिछले कई वर्षों से तमिलनाडु के साथ पानी के बंटवारे को लेकर मंडा्या के किसानों का गुस्सा चरम पर रहा है। जब भी जल संकट गहराता है, मंडा्या की सड़कें आंदोलनों का गवाह बनती हैं। हमारे जमीनी संवाददाताओं के अनुसार, यहां का मतदाता अब पारंपरिक भावनात्मक मुद्दों के साथ-साथ विकास, सिंचाई के नए साधनों और युवाओं के लिए रोजगार जैसे मुद्दों पर भी खुलकर बात कर रहा है। किसानों का यह बदलता मिजाज राजनीतिक दलों के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहा है।





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