नई दिल्ली/चंडीगढ़: 'द फ्रीलेंस' की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट। भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। हरियाणा के जींद जिले की बेटी मनीषा भानवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप (World Wrestling Championship) के अखाड़े में देश का नाम न केवल रोशन किया है, बल्कि एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगा। मनीषा इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गई हैं। यह जीत केवल एक पदक नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, संकल्प और एक बेटी के उस वादे की दास्तान है जो उसने अपने दिवंगत पिता से किया था।
खोजी पत्रकारिता के दृष्टिकोण से जब हमने इस सफलता के पीछे की पृष्ठभूमि को खंगाला, तो जो तथ्य सामने आए वे अत्यंत भावुक करने वाले हैं। वर्ष 2022 में दिल का दौरा पड़ने (Heart Attack) से मनीषा के सिर से उनके पिता का साया उठ गया था। एक पहलवान के सफर में पिता का मार्गदर्शक होना सबसे बड़ी ताकत होती है। उस अप्रत्याशित आघात के बाद भी मनीषा ने अपना मानसिक संतुलन नहीं खोया। उन्होंने अपने पिता के उस सपने को अपना लक्ष्य बनाया, जिसमें वे अपनी बेटी को विश्व चैंपियन के रूप में देखना चाहते थे। ठीक चार साल के कड़े संघर्ष, पसीने और खून-पसीने की मेहनत के बाद मनीषा ने वह मुकाम हासिल कर लिया, जो आज तक कोई भारतीय महिला रेसलर नहीं कर पाई थी।
इस ऐतिहासिक जीत के बाद से ही राजनीतिक और खेल जगत से बधाइयों का तांता लग गया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जींद की इस बेटी को फोन कर बधाई दी और इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। खेल विश्लेषकों का मानना है कि मनीषा की यह जीत भारत में महिला कुश्ती की दिशा और दशा दोनों को बदल देगी। ग्रासरूट लेवल पर खेल सुविधाओं और संघर्ष कर रहे खिलाड़ियों के लिए यह सफलता एक नई उम्मीद लेकर आई है।
'द फ्रीलेंस' की टीम ने जब इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण किया, तो यह स्पष्ट हुआ कि मनीषा का यह सफर कतई आसान नहीं था। महिला पहलवानों के सामने आने वाली सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को पार करते हुए उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह हर युवा के लिए एक मिसाल है। पिता की मृत्यु के बाद उपजे शून्य को अपनी ताकत बनाकर अखाड़े में उतरना और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों को धूल चटाना साधारण उपलब्धि नहीं है। आज पूरा देश मनीषा भानवाला की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है, और हमारी यह खोजी रिपोर्ट देश की इस बेटी के अदम्य साहस को सलाम करती है।












