इजरायली राजनीति में भूचाल: त्रिशंकु संसद के आसार
इजराइल के चुनावी मैदान से एक बार फिर बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित रुझान सामने आ रहे हैं। 'द फ्रीलान्स' के खोजी विश्लेषण और विभिन्न मीडिया स्रोतों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, देश एक बार फिर गंभीर राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड और उनके धुर विरोधी गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाला गठबंधन—दोनों ही सरकार गठन के लिए जरूरी बहुमत के जादुई आंकड़े से फिलहाल काफी दूर नजर आ रहे हैं। इस राजनीतिक गतिरोध ने इजराइल की घरेलू राजनीति के साथ-साथ वैश्विक कूटनीति में भी हलचल तेज कर दी है।
नेतन्याहू का संघर्ष और लिकुड गठबंधन की स्थिति
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और एग्जिट पोल के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला लिकुड गठबंधन बढ़त तो बनाए हुए है, लेकिन यह बढ़त सत्ता की पूर्ण सीढ़ी तक पहुंचने के लिए नाकाफी साबित हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नेतन्याहू सातवीं बार प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच भी जाते हैं, तो उन्हें बेहद कमजोर और मिली-जुली गठबंधन सरकार चलानी होगी। उनके समक्ष देश की सुरक्षा प्राथमिकताओं, आर्थिक चुनौतियों और न्यायपालिका सुधार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आम सहमति बनाना एक लोहे के चने चबाने जैसा होगा।
गादी आइजनकोट: एक मजबूत और अप्रत्याशित चुनौती
इस चुनाव में नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं गादी आइजनकोट। अपने बेटे की शहादत के बाद राजनीति में कदम रखने वाले आइजनकोट ने इजरायली मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को अपनी ओर आकर्षित किया है। उनकी आक्रामक और स्पष्ट राजनीतिक शैली ने नेतन्याहू के एकाधिकार को कड़ी टक्कर दी है। आइजनकोट के नेतृत्व में विपक्षी खेमा लगातार यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि मौजूदा नेतृत्व देश को स्थिरता देने में विफल रहा है, जिसके चलते मतदाताओं ने विभाजित जनादेश दिया है।











