राजनीतिक गलियारों में हलचल
अमेरिका में हालिया चुनावी नतीजों के बाद भारतीय राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका में एक मुस्लिम उम्मीदवार की जीत पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। ओवैसी ने स्पष्ट किया है कि अब समय आ गया है कि मुस्लिम समुदाय केवल 'दरी बिछाने' का काम न करे, बल्कि सत्ता में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करे।
ओवैसी का आक्रामक रुख
ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका जैसे विकसित लोकतंत्र में यदि एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी पहचान के साथ जीत हासिल कर सकता है, तो भारत में यह क्यों संभव नहीं है? उन्होंने उत्तर प्रदेश के संदर्भ में कहा कि दशकों से मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों ने समुदाय को केवल दरी बिछाने और रैलियों में भीड़ जुटाने तक सीमित रखा है। अब यह स्थिति बदलने वाली है।
यूपी की बारी: क्या हैं मायने?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह बयान उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक को लामबंद करने की एक सोची-समझी रणनीति है। ओवैसी की पार्टी AIMIM पिछले कुछ समय से यूपी के मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 'दरी नहीं बिछाएंगे' का नारा सीधे तौर पर उन दलों को चुनौती है जो मुस्लिम वोटों के दम पर सत्ता का सुख भोगते रहे हैं। यह बयान यह संकेत देता है कि ओवैसी अब यूपी में एक स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरना चाहते हैं।











