इजरायल चुनाव 2026: एक राष्ट्र, एक फैसला और नेतन्याहू की राजनीतिक अग्निपरीक्षा
'द फ्रीलेंस' के लिए विशेष खोजी रिपोर्ट। आज इजरायल के इतिहास का एक बेहद अहम और निर्णायक दिन है। देश भर में साल 2026 के आम चुनावों के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। करीब 73 लाख पात्र मतदाता आज अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में इजरायल के राजनीतिक, सामाजिक और रणनीतिक भविष्य की रूपरेखा तय करेंगे। इस चुनाव की धुरी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (बीबी) के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है, जिनके राजनीतिक करियर और साख दांव पर लगे हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय दबाव और घरेलू मोर्चे पर आर्थिक चुनौतियों के बीच हो रहे ये चुनाव इजरायली लोकतंत्र के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुके हैं। बीते कुछ वर्षों में मध्य पूर्व में आए भू-राजनीतिक भूकम्प, लगातार संघर्ष और वैश्विक कूटनीति के बीच नेतन्याहू का नेतृत्व हमेशा बहस के केंद्र में रहा है। एक तरफ उनके समर्थक उन्हें इजरायल की सुरक्षा का सबसे बड़ा प्रहरी मानते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनके विरोधी नीतियों और आंतरिक मामलों को लेकर मुखर हैं। आज मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें इस बात की गवाही दे रही हैं कि जनता इस बार बदलाव चाहती है या फिर से वर्तमान नेतृत्व पर भरोसा जताती है।
भारत के सामरिक हितों पर क्या होगा असर?
इस चुनाव के नतीजे केवल तेल अवीव और येरुशलम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा असर भारत और इजरायल के द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ना तय है। पिछले कुछ दशकों में दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में अभूतपूर्व मजबूती आई है। बेंजामिन नेतन्याहू और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच व्यक्तिगत तालमेल ने इन रणनीतिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। ऐसे में, यदि सत्ता में परिवर्तन होता है या नेतन्याहू कमजोर होकर उभरते हैं, तो नई दिल्ली को अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं और रणनीतिक समीकरणों को नए सिरे से साधना पड़ सकता है।
'द फ्रीलेंस' की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि इजरायली समाज वैचारिक रूप से गहराई से बंटा हुआ है। सुरक्षा के मुद्दों पर आम सहमति होने के बावजूद, आंतरिक शासन व्यवस्था और न्यायपालिका के अधिकारों जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जनता दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है। सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम के बीच मतदान सुचारू रूप से जारी है। अब सबकी निगाहें एग्जिट पोल और उसके बाद आने वाले अंतिम चुनावी परिणामों पर टिकी हैं। क्या 'बीबी' एक बार फिर अपनी राजनीतिक जादूगरी से वापसी करेंगे या इजरायल की जनता ने किसी नए नेतृत्व को आजमाने का मन बना लिया है? इसका जवाब आज की रात मिलने वाले चुनावी रुझानों से ही साफ हो पाएगा।
