'द फ्रीलांस' विशेष रिपोर्ट: शून्य कैजुअल्टी का ऐतिहासिक मील का पत्थर
देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने सुरक्षा और रणनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। आधिकारिक और विभिन्न मीडिया स्रोतों से प्राप्त प्राथमिक जानकारियों के अनुसार, बल ने अपने इतिहास में पहली बार एक पूरे वर्ष के दौरान किसी भी ऑपरेशन के दौरान एक भी जवान की जान गंवाने का रिकॉर्ड नहीं बनाया है। यह उपलब्धि पिछले 47 वर्षों के इतिहास में पहली बार दर्ज की गई है, जिसने देश भर की सुरक्षा व्यवस्था और रणनीतिकारों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
रणनीतिक बदलाव और तकनीकी आधुनिकीकरण का परिणाम
विशेषज्ञों और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह अभूतपूर्व उपलब्धि रातों-रात नहीं मिली है। पिछले कुछ वर्षों में वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में सीआरपीएफ की कार्यशैली में भारी बदलाव आया है। खुफिया आधारित अभियानों (Intelligence-based operations), आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, उन्नत हथियारों, ड्रोन सर्विलांस और बेहतर रणनीतिक समन्वय ने ऑपरेशनों के दौरान जोखिम को न्यूनतम स्तर तक ला दिया है। इसके अलावा, जवानों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (BPJ और अन्य गियर) की गुणवत्ता में सुधार और त्वरित चिकित्सा निकासी (Evacuation) प्रणालियों ने भी जानलेवा हादसों को टालने में अहम भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना
सीआरपीएफ के इस ऐतिहासिक और गौरवशाली रिकॉर्ड पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे एक ऐसा 'शून्य' करार दिया है जो शब्दों से परे बहुत कुछ कह जाता है। प्रधानमंत्री ने बल के जवानों के साहस, अनुशासन और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाले कमांड स्ट्रक्चर की पीठ थपथपाई है। राजनीतिक गलियारों और रक्षा विशेषज्ञों के बीच भी इस बात की चर्चा है कि यह रिकॉर्ड भारत की आंतरिक सुरक्षा नीति की परिपक्वता को दर्शाता है।











