नई दिल्ली: मनोरंजन जगत में इन दिनों दक्षिण भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय अदाकारा कीर्ति सुरेश अपनी नई वेब सीरीज 'अक्का' (Akka) को लेकर खासी सुर्खियों में बनी हुई हैं। 'द फ्रीलेंस' के खोजी और विश्लेषणात्मक पन्नों में जब हमने इस प्रोजेक्ट की गहराई से पड़ताल की, तो यह सामने आया कि यह सीरीज जितनी चर्चा में है, उतनी ही यह दर्शकों और समीक्षकों के तीखे सवालों के घेरे में भी आ चुकी है। सीरीज के रिलीज होने के साथ ही इसके कथानक, वैचारिक पृष्ठभूमि और पटकथा पर बहस छिड़ गई है।
मातृसत्ता का छलावा या पितृसत्ता का नया रूप?
मीडिया सूत्रों से प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार, 'अक्का' की कहानी एक ऐसे ताने-बाने पर बुनी गई है जो समाज में सत्ता के समीकरणों को टटोलती है। सीरीज की मूल थीम को लेकर यह सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि क्या यह मातृसत्ता का कोई छलावा है या फिर यह पितृसत्ता का ही एक नया और आधुनिक रूप मात्र है? इस वैचारिक द्वंद्व ने दर्शकों और विश्लेषकों को दो हिस्सों में बांट दिया है। जहां कुछ लोग इसे एक साहसिक प्रयोग मान रहे हैं, वहीं अधिकांश दर्शक इसे समाज की वास्तविक जटिलताओं को सतही तौर पर छूने वाला प्रयास बता रहे हैं।
राधिका आप्टे और कीर्ति सुरेश का दमदार अभिनय
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि 'अक्का' में दो दिग्गज अभिनेत्रियों—राधिका आप्टे और कीर्ति सुरेश—को एक साथ स्क्रीन पर देखना अपने आप में एक बड़ा आकर्षण है। दोनों ही कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों में जान फूंकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनके अभिनय की गहराई, संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस की हर तरफ तारीफ हो रही है। क्रिटिक्स का भी मानना है कि सीरीज के यदि सबसे मजबूत स्तंभों की बात की जाए, तो वह निस्संदेह इन दोनों अभिनेत्रियों का बेजोड़ अभिनय ही है।












