स्रोत / Source: X (@VishalMYadav_)
मनोरंजन जगत की चकाचौंध भरी दुनिया के पीछे छिपे काले सच समय-समय पर कलाकारों के बयानों के जरिए बाहर आते रहते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर अभिनेत्री श्वेता केसरवानी का एक पॉडकास्ट क्लिप तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने एक बड़े फिल्म निर्माता के साथ अपने कड़वे अनुभव को साझा किया है। इस खुलासे ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में व्याप्त कास्टिंग काउच, सत्ता के दुरुपयोग और पेशेवर नैतिकता के अभाव जैसे गंभीर मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
वायरल वीडियो में श्वेता बता रही हैं कि कैसे वे एक प्रतिष्ठित फिल्म के लिए बड़े बैनर के एक नामी प्रोड्यूसर से मिलने गईं थीं। मुलाकात के दौरान उस निर्माता का रवैया बेहद आपत्तिजनक और असहज करने वाला था। प्रोफेशनल मीटिंग के बजाय उस व्यक्ति का पूरा ध्यान अभिनेत्री के चेहरे और शारीरिक बनावट पर था, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण था कि उसकी नीयत फिल्म निर्माण की नहीं बल्कि अपने पद का गलत फायदा उठाने की थी। इन परिस्थितियों को भांपते हुए श्वेता ने तुरंत विवेक का परिचय दिया और उस फिल्म को करने से साफ इनकार कर दिया।
यह घटना केवल एक अभिनेत्री की व्यक्तिगत आपबीती नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्थागत बीमारी का आईना है जो दशकों से मनोरंजन उद्योग की जड़ों में दीमक की तरह लगी हुई है। जब स्थापित और अनुभवी कलाकार इस तरह के शोषण का शिकार हो सकते हैं, तो नए कलाकारों, विशेषकर संघर्षरत नवागंतुकों की स्थिति का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरासमेंट - पॉश) कानून होने के बावजूद, अनौपचारिक और ग्लैमरस क्षेत्रों में इनका प्रभावी क्रियान्वयन आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।