स्रोत / Source: X (@VishalMYadav_)
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने एक बार फिर मानवता और नागरिक कर्तव्यों पर गंभीर सवाल खड़े करने के साथ-साथ इंसानियत की एक मिसाल भी पेश की है। यह पूरा मामला ग्रेटर नोएडा के विजय नगर स्थित उत्तम हॉस्पिटल का है। वायरल वीडियो के विवरण के अनुसार, मीनाक्षी नामक महिला बीती रात अपने घर लौट रही थीं, जब रास्ते में उन्हें एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हुए लोग मिले। ऐसे में, बिना किसी औपचारिकता या उदासीनता के, उन्होंने घायलों को अपनी ही गाड़ी में बैठाया और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।
घटनास्थल पर स्थिति बेहद भयावह थी। घायल व्यक्ति की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है, और उसकी पत्नी सदमे में थी तथा बुरी तरह रो रही थी। इस वीडियो के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां लोग मीनाक्षी की संवेदनशीलता और 'गुड समरिटन' (नेक बंदे) वाले रवैये की भूरी-भूरी प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह घटना हमारे समाज की उस कड़वी सच्चाई को भी उजागर करती है जहां सड़क हादसों के वक्त लोग तमाशबीन बन जाते हैं या डर के मारे घायलों से दूरी बना लेते हैं।
सड़क सुरक्षा और नागरिक सतर्कता के लिहाज से यह घटना बेहद महत्वपूर्ण है। भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में हजारों लोगों की जान सिर्फ इसलिए चली जाती है क्योंकि उन्हें समय पर चिकित्सीय सहायता (गोल्डन ऑवर) नहीं मिल पाती। लोग कानूनी झंझटों और पुलिस पूछताछ के डर से घायलों की मदद करने से कतराते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले 'गुड समरिटन' को पुलिस या अदालतों द्वारा परेशान नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर जागरूकता की भारी कमी है।