स्रोत / Source: X (@VishalMYadav_)
डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन यानी बीटीसी (BTC) की डिग्री हाथ में लिए हजारों युवा आज एक बार फिर सड़क पर हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वायरल हुए एक ताजा वीडियो क्लिप ने प्रशासनिक व्यवस्था और शिक्षा नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो के साथ जारी कैप्शन में साफ झलकता दर्द सिर्फ एक व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि उस पूरी युवा पीढ़ी की आवाज है जो योग्यता होने के बावजूद रोजगार की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर है।
योग्यता बनाम अवसर: सिस्टम के सामने खड़ी बड़ी चुनौती
इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर 'काबिलियत और कुर्सी' के अंतर्विरोध को उजागर कर दिया है। सरकारें और शिक्षा विभाग लगातार शिक्षक पात्रता परीक्षाओं और डिग्री कोर्सों के जरिए योग्य युवाओं तैयार तो कर रहे हैं, लेकिन जब रोजगार सृजन की बारी आती है, तो प्रक्रियाएं अक्सर नौकरशाही के लाल फीताशाही में उलझकर रह जाती हैं। बीटीसी जैसी प्रोफेशनल डिग्री हासिल करने के बाद भी यदि युवाओं को प्राथमिक विद्यालयों में रिक्त पदों के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह नीतिगत नियोजन पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।
सड़क सुरक्षा और नागरिक प्रदर्शन का पहलू
ऐसे विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक और अहम पहलू उभरकर सामने आता है—नागरिक अधिकार और सड़क सुरक्षा। लोकतांत्रिक देश में अपनी मांग रखना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन कई बार उग्र भीड़ या प्रशासनिक उदासीनता के चलते यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है, जिससे आम नागरिकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है। हालांकि, वायरल फुटेज में युवाओं का असंतोष व्यवस्था के प्रति उनकी लाचारी और सिस्टम की सुस्ती को बयां कर रहा है।






