स्रोत / Source: X (@rameshofficial0)
एक साल का इंतजार और न्याय की आस में भटकता परिवार
सोशल मीडिया पर इन दिनों हरियाणा के हिसार से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो क्लिप में एक छोटा बच्चा अपनी लापता बहन हर्षिता सोनी (16 वर्ष) की तलाश के लिए अत्यंत भावुक अंदाज में गुहार लगाता नजर आ रहा है। बच्चे की आंखों के आंसू और उसकी आवाज में झलकता दर्द किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर देने के लिए काफी है। एक साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी एक नाबालिग लड़की का सुराग न लग पाना न केवल कानून-व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है।
लापता बच्चों के मामले और प्रशासनिक सुस्ती
भारत में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े गवाही देते हैं कि हर साल हजारों बच्चे लापता होते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा नाबालिग लड़कियों का होता है। इनमें से कई मामलों में मानव तस्करी, बाल श्रम या अन्य गंभीर अपराधों की आशंका बनी रहती है। इस घटना के संदर्भ में देखें तो हिसार पुलिस की एक साल की यह चुप्पी और नाकामी प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर भारी प्रश्नचिह्न लगाती है। क्या हमारी पुलिस और जांच एजेंसियां इतनी सुस्त हो चुकी हैं कि वे डिजिटल युग और आधुनिक सर्विलांस के दौर में भी एक 16 साल की लड़की को खोजने में असमर्थ हैं? यह स्थिति न केवल पुलिसिया तंत्र की विफलता को दर्शाती है, बल्कि पीड़ित परिवार के लिए हर दिन एक मानसिक प्रताड़ना जैसी है।







