स्रोत / Source: X (@VishalMYadav_)
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वायरल हुआ एक वीडियो इन दिनों देश भर के युवाओं और खासकर शिक्षक पात्रता परीक्षा (BTC/DElEd) पास युवाओं के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वीडियो के साथ दिए गए कैप्शन—'कुर्सी के आगे भूखी काबिलियत 😭 बीटीसी करके हम तैयार, फिर नौकरी से क्यों दूर है यार'—ने केवल एक दर्द बयां किया है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर भी एक गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। 'द फ्रीलांस' की डिजिटल वीडियो डेस्क द्वारा की गई पड़ताल में यह बात सामने आई है कि यह महज एक वीडियो नहीं, बल्कि उन हजारों शिक्षित युवाओं की चीख है जो वर्षों से डिग्रियां हाथ में लिए सरकारी नौकरियों की कतार में खड़े हैं।
इस संपूर्ण घटनाक्रम का सामाजिक संदर्भ बेहद गंभीर है। एक तरफ जहां सरकारें डिजिटल इंडिया, कौशल विकास और शिक्षित समाज की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर प्रशिक्षित युवाओं का बेरोजगार घूमना एक विरोधाभास पैदा करता है। बीटीसी जैसी विशेष शिक्षण ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भी यदि युवाओं को रोजगार के अवसर न मिलें, तो यह न केवल व्यक्तिगत हताशा को जन्म देता है, बल्कि पूरे समाज में उच्च शिक्षा के प्रति मोहभंग की स्थिति पैदा करता है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि जब युवाओं की योग्यता और उनकी आजीविका के बीच खाई चौड़ी होने लगती है, तो यह मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक ताने-बाने दोनों के लिए खतरनाक साबित होता है।
प्रशासनिक नियमों और नीतिगत मोर्चे पर यदि गौर करें, तो यह मामला केवल एक राज्य या एक भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। प्राथमिक शिक्षा में शिक्षकों के रिक्त पदों और पात्र उम्मीदवारों के बीच समन्वय की कमी अक्सर इस प्रकार के असंतोष को जन्म देती है। एक तरफ विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की खबरें आती हैं, तो दूसरी तरफ प्रशिक्षित युवा सड़कों पर आंदोलन करने या सोशल मीडिया का सहारा लेने को मजबूर हैं। प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता, समयबद्ध भर्तियां और नीतिगत स्पष्टता का अभाव ही इस बेबसी की मुख्य वजह है, जिसे युवा अपनी 'भूखी काबिलियत' के रूप में व्यक्त कर रहे हैं।





