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द फ्रीलांस खोजी रिपोर्ट: प्रशासनिक सुस्ती और एक भाई का दर्द
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इन दिनों एक दिल दहला देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक मासूम बच्चा अपनी लापता बहन हर्षिता सोनी के लिए न्याय की गुहार लगा रहा है। हरियाणा के हिसार जिले से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर देश की कानून व्यवस्था और पुलिस तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के एक साल बीत जाने के बाद भी एक 16 साल की नाबालिग लड़की का सुराग न मिल पाना, प्रशासनिक मशीनरी की संवेदनशीलता और उसकी कार्यकुशलता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक छोटा भाई अपनी बड़ी बहन के बिना अधूरे परिवार का दर्द बयां कर रहा है। उसकी आंखों के आंसू और गले से निकला हर एक शब्द सिस्टम के उस खोखलेपन को उजागर करता है, जहां कागजी कार्रवाई फाइलों में दबकर रह जाती है और असल जिंदगी में परिवार अपनों को ढूंढते-ढूंढते बूढ़े हो जाते हैं। यह महज़ एक भाई की अपील नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज और राज्य की उन प्राथमिकताओं पर सवाल है, जहां नागरिकों की सुरक्षा और त्वरित न्याय का दावा खोखला साबित होता है.
नागरिक सतर्कता और सामाजिक सरोकार की अनिवार्यता
इस तरह की घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हमारा समाज और हमारे शहर सुरक्षित हैं? आज के डिजिटल युग में जहां हर कोने पर सीसीटीवी कैमरे और पुलिस चौकियों का जाल है, एक नाबालिग लड़की का एक साल तक गायब रहना और पुलिस के पास कोई ठोस सुराग न होना चिंताजनक है। नागरिक सतर्कता इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अक्सर ऐसे मामलों में आम जनता की सोशल मीडिया भागीदारी और जागरूकता ही जांच एजेंसियों को जगाने का काम करती है। जब तक समाज और प्रशासन मिलकर दबाव नहीं बनाएंगे, तब तक ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद करना बेमानी होगा।






