दिवाली 2024: आर्थिक उछाल और उपभोक्ता बाजार का नया इतिहास
द द फ्रीलेंस (The FreeLance) की विशेष खोजी रिपोर्ट। इस बार का त्योहारी सीजन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अभूतपूर्व मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। बाजार के शुरुआती रुझानों और विभिन्न व्यापारिक संगठनों से मिले आंकड़ों के अनुसार, इस दिवाली देश भर में उपभोक्ता लगभग 5,00,000 करोड़ रुपये (5 लाख करोड़) उड़ने या खर्च करने के लिए तैयार हैं। बाजारों की रौनक बता रही है कि इस बार 'झाड़ू से लेकर कार तक' सब कुछ बिकेगा। आम से लेकर खास वर्ग तक, हर कोई खरीदारी के इस महाकुंभ में अपनी हिस्सेदारी दर्ज करा रहा है।
अंबाला से लेकर महानगरों तक सजा बाजार
जमीनी स्तर पर हमारी फील्ड रिपोर्टिंग बताती है कि बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है। अंबाला जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी व्यापारिक गतिविधियां चरम पर हैं। महज 10 रुपये के झूमर और 20 रुपये की बंदनवार जैसी छोटी वस्तुएं भी स्थानीय कारीगरों और दुकानदारों के चेहरों पर मुस्कान ला रही हैं। स्थिति यह है कि महज 100 रुपये के बजट में भी आज लोग अपने घरों को रोशन करने के लिए सामान खरीद पा रहे हैं। दूसरी ओर, ऑटोमोबाइल सेक्टर में कारों और दोपहिया वाहनों की डिलीवरी के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट यह बताने के लिए काफी है कि मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति में इजाफा हुआ है।
वैश्विक फलक पर दिवाली और कूटनीतिक संदेश
केवल घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इस पर्व की गूंज सुनाई दे रही है। हाल ही में व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति पद के दावेदार डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिवाली मनाए जाने की खबर ने इस पर्व के सांस्कृतिक और कूटनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया है। इस आयोजन में भारतीय मूल के कई दिग्गज शामिल हुए, और इस दौरान मेहमानों को हनुमान चालीसा जैसे सांस्कृतिक प्रतीक तोहफे के रूप में मिले। यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति और त्योहार अब वैश्विक पटल पर एक मजबूत सांस्कृतिक पूंजी बन चुके हैं।











