नई दिल्ली: 'द फ्रीलेंस' की विशेष खोजी रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बहुप्रतीक्षित महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। विभिन्न मीडिया सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और प्रशासनिक गलियारों से छनकर आए आंकड़ों के मुताबिक, महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की ठोस बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद यह 60 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 63 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इस संशोधन का सीधा असर देश के करोड़ों सरकारी कर्मचारियों के मासिक वेतन और पेंशनभोगियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा।
डीए बढ़ोतरी का पूरा वित्तीय गणित
नवीनतम घोषणा के अनुसार, डीए की गणना कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Salary) के आधार पर की जाती है। चूंकि महंगाई भत्ता अब 60% से बढ़कर 63% हो गया है, इसलिए इन-हैंड सैलरी में होने वाले इजाफे का गणित समझना बेहद जरूरी है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी सरकारी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये प्रति माह है, तो 3 प्रतिशत की इस बढ़ोतरी से उसके मासिक वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ठीक इसी प्रकार, 50,000 रुपये या उससे अधिक बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के वेतन में भी आनुपातिक रूप से बड़ा लाभ देखने को मिलेगा।
किसे कितना फायदा?
खोजी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जिनकी मूल सैलरी का दायरा मध्यम से उच्च श्रेणी में आता है। 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को डीए के 3% बढ़ने से हर महीने एक निश्चित अतिरिक्त राशि का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, सरकार द्वारा एरियर (एरियर भुगतान) के नियमों पर भी स्थिति जल्द ही स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है, जिससे कर्मचारियों को पिछले महीनों का बकाया पैसा भी मिल सकेगा।










