चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का कहर: उत्तर से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक मौसम का मिजाज बदला
'द फ्रीलेंस' की विशेष खोजी रिपोर्ट। देश के एक बड़े हिस्से में मौसम ने अचानक करवट ली है, जिसका मुख्य कारण 'चक्रवाती तूफान अर्नब' को बताया जा रहा है। विभिन्न मीडिया और मौसम स्रोतों से प्राप्त प्राथमिक जानकारियों के अनुसार, इस चक्रवाती तूफान का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और इसका सीधा असर कम से कम सात प्रमुख राज्यों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ से अपनी सक्रियता शुरू करते हुए यह तूफान अब झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश तक अपनी पहुंच बना चुका है। मौसम विभाग और प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आगामी 29 अक्टूबर को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें कई इलाकों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
राज्यों में तबाही के संकेत: हिमाचल से लेकर पूर्वी यूपी तक प्रशासनिक चौकसी
इस खतरनाक चक्रवात के प्रभाव से मैदानी और पहाड़ी दोनों ही क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हिमाचल प्रदेश से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के लगभग 6 प्रमुख जिलों में चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव के चलते मूसलाधार बारिश के साथ-साथ तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) की गंभीर चेतावनी जारी की गई है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भी साइक्लोन अर्नब का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। पूर्वी यूपी के कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं के मद्देनजर अलर्ट घोषित कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों पर भी मंडराया साया
केवल दूरदराज के राज्य ही नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली और उससे लगे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। तापमान में गिरावट के साथ आसमान में बादलों का डेरा और ठंडी हवाओं का दौर शुरू हो गया है। हरियाणा और बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्यों में भी इस बेमौसम बारिश और चक्रवाती गतिविधियों के कारण फसलों को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। 'द फ्रीलेंस' की पड़ताल के अनुसार, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड के तटीय तथा अंदरूनी इलाकों में पहले से ही मौसम ने विकराल रूप धारण कर लिया था, जो अब उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की ओर रुख कर चुका है।











