द फ्रीलान्स विशेष खोजी रिपोर्ट
क्रिकेट के मैदान पर अक्सर खेल से जुड़े रोमांचक किस्से और रिकॉर्ड्स सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही सीरीज के दौरान एक ऐसा मुद्दा सामने आया है जिसने खेल प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। कीवी तेज गेंदबाज जैकब डफी ने मैच के तय समय पर खुलकर आपत्ति जताई है, जिसके बाद खेल जगत में बहस छिड़ गई है।
'द फ्रीलान्स' के खोजी अनुसंधान के अनुसार, भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रहे मुकाबलों के दौरान मौसम, ब्रॉडकास्टिंग शेड्यूलिंग और स्थानीय परिस्थितियों को लेकर लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दूसरे वनडे मुकाबले में जहां एक तरफ शुभमन गिल द्वारा टॉस जीतने और ओवरों में कटौती किए जाने की खबरें आईं, वहीं विराट कोहली के महज 7 रन बनाने के बावजूद एक नया इतिहास रचने का कारनामा भी दर्ज हुआ। लेकिन इन तमाम खेलगत उपलब्धियों के बीच जैकब डफी की यह टिप्पणी कि 'मैच का समय सही नहीं है', प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है।
खेल विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैच के समय का निर्धारण खिलाड़ियों के शारीरिक स्वास्थ्य, ओस की भूमिका और ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग के समय को ध्यान में रखकर किया जाता है। जैकब डफी ने जिस प्रकार इस विषय को सार्वजनिक मंच पर उठाया है, वह खिलाड़ियों के उस असंतोष को उजागर करता है जिसे अक्सर पर्दे के पीछे दबा दिया जाता है। क्या वाकई क्रिकेट बोर्ड्स खिलाड़ियों की सहूलियत से ज्यादा व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं? यह एक ऐसा गंभीर प्रश्न है जिस पर आईसीसी (ICC) और संबंधित क्रिकेट बोर्ड्स को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।
हमारी टीम द्वारा जुटाई गई जानकारी बताती है कि कम रोशनी और ओवरों में कटौती जैसी समस्याएं केवल खेल के रोमांच को ही कम नहीं करतीं, बल्कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी प्रभावित करती हैं। एक तरफ जहां भारतीय टीम तमाम बाधाओं के बावजूद मैदान पर अपने रिकॉर्ड्स दर्ज कर रही है, वहीं जैकब डफी का यह बयान इस बात का प्रमाण है कि मैदान के भीतर और बाहर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में खेल प्रबंधन की कमियों पर और भी चौंकाने वाले खुलासे सामने लाएगा।











