'द फ्रीलांस' की विशेष खोजी रिपोर्ट में आज हम चर्चा कर रहे हैं भारतीय क्रिकेट के उस युवा और प्रतिभाशाली चेहरे की, जिसने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमिट छाप छोड़ी, लेकिन हाल के दिनों में वह मैदान से ज्यादा प्रशासकों और चयनकर्ताओं के साथ अपने संबंधों को लेकर सुर्खियों में रहे। हम बात कर रहे हैं बाएं हाथ के आक्रामक विकेटकीपर-बल्लेबाज इशान किशन की, जिनका करियर इस समय एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।
प्रारंभिक चमक और करियर की ऊंचाइयां
झारखंड के छोटे से शहर से निकलकर भारतीय टीम तक का सफर तय करने वाले इशान किशन ने अपनी निर्भीक बल्लेबाजी शैली से सभी का ध्यान खींचा। अंडर-19 विश्व कप में भारतीय टीम की कप्तानी करने से लेकर आईपीएल (IPL) और फिर टीम इंडिया के लिए तीनों फॉर्मेट में अपने जौहर दिखाने तक, इशान ने तेजी से प्रगति की। उनकी दोहरा शतक जड़ने की क्षमता और विकेट के पीछे की फुर्ती ने उन्हें भारतीय टीम के भविष्य की योजनाओं का एक अहम हिस्सा बना दिया था। हालांकि, आधुनिक क्रिकेट के अत्यधिक दबाव और व्यस्त शेड्यूल ने कई खिलाड़ियों की तरह इशान के सामने भी मानसिक और शारीरिक थकान जैसी चुनौतियां खड़ी कीं।
बीसीसीआई के साथ अनुबंध विवाद और 'ब्रेक'
विवादों की शुरुआत तब हुई जब इशान किशन ने दक्षिण अफ्रीका दौरे के बीच से मानसिक थकान का हवाला देते हुए ब्रेक लिया और स्वदेश लौट आए। इसके बाद से ही उनके और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के बीच खींचतान की खबरें सामने आने लगीं। मुख्य कोच राहुल द्रविड और चयनकर्ताओं की स्पष्ट हिदायत के बावजूद कि खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में चयन के लिए घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) खेलना अनिवार्य है, इशान ने झारखंड के लिए घरेलू मैच खेलने से दूरी बनाए रखी। इस अनुशासनहीनता या अनदेखी का परिणाम यह हुआ कि बीसीसीआई ने उन्हें अपने केंद्रीय अनुबंध (Central Contract) से बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह निर्णय भारतीय क्रिकेट में एक कड़ा संदेश देने वाला साबित हुआ कि देश के केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता देना सर्वोपरि है।













