नई दिल्ली/कोलकाता: 'द फ्रीलेंस' के लिए विशेष खोजी रिपोर्ट। देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में होने वाली आगामी राजनीतिक रैली को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है। इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी के रुख ने राष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है। I.N.D.I.A. गठबंधन की आगामी रणनीतियों के बीच ममता बनर्जी के तेवर और उनके द्वारा दिए गए बयान विपक्षी खेमे और सत्ताधारी दल दोनों के लिए चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
प्राप्त प्राथमिक जानकारियों और हमारे खोजी इनपुट के अनुसार, ममता बनर्जी ने आगामी 1 नवंबर को होने वाली रामलीला मैदान की रैली को लेकर एक बेहद आक्रामक और स्पष्ट रणनीति तैयार की है। सूत्रों का कहना है कि इस रैली के माध्यम से विपक्षी गठबंधन अपनी ताकत का बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी में है। ममता बनर्जी ने इस रैली के लिए लगभग 10 लाख लोगों को जुटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उनका साफ कहना है कि देश में लोकतंत्र और 'वोट देने का अधिकार' खतरे में है, ऐसे में जनता और विपक्षी दलों को चुप नहीं बैठना चाहिए।
ममता बनर्जी का I.N.D.I.A. गठबंधन को लेकर बड़ा संदेश
विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के भीतर सीट शेयरिंग और नेतृत्व को लेकर भले ही आंतरिक मंथन जारी हो, लेकिन ममता बनर्जी ने रामलीला मैदान की इस रैली के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर तानाशाही ताकतों के खिलाफ एकजुट होना वक्त की सबसे बड़ी मांग है। ममता के इस कदम को गठबंधन में उनकी सक्रिय और अगुआ भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, गठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ समन्वय बिठाना और इस विशाल भीड़ को जुटाना टीएमसी के लिए एक बड़ी चुनौती भी साबित हो सकता है।
विपक्ष पर भाजपा की पैनी नजर और तीखी प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने 'इंडिया ब्लॉक' की रैली और इसे मिल रहे विभिन्न क्षेत्रीय संगठनों व राजनीतिक दलों के समर्थन पर करारा तंज कसा है। नितिन नवीन ने एक बयान में कहा, 'हम भी यही चाहते हैं... अब ये खुद ही सब कुछ डिक्लेअर कर रहे हैं।' भाजपा का मानना है कि विपक्षी गठबंधन में आंतरिक विरोधाभास चरम पर है और जनता इनoportune गठबंधनों की असलियत भली-भांति जानती है। इसके अलावा, हाल ही में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) जैसे छोटे और क्षेत्रीय संगठनों द्वारा इस रैली को समर्थन दिए जाने की खबरों ने भी राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट बढ़ा दी है।











